A beggar story : झूठा भिखारी और दान

A beggar story : झूठा भिखारी और दान

गली में जोर-जोर से भिखारी चिल्ला रहा था, ‘मेरी मदद करो, गरीब की मदद करो, अल्लाह तुम्हें बहुत देगा।’

कुछ औरतें घर से आटा, पैसा लेकर बाहर आई और भिखारी को देने लगीं, परंतु उसने आटा पैसे लेने से इंकार कर दिया। सब आश्चर्य से उसे देखने लगे। वही नुक्कड़ पर चार-पांच युवक खड़े थे। भिखारी के आटा-पैसे न लेने पर वह भी उसे देखने लगे। फिर उन्होंने भी उसे लेने को कहा, किंतु उसने कुछ भी नहीं लिया। तब एक लड़के ने पूछा, ‘तो तुम्हें क्या चाहिए बाबा ?’ भिखारी बोला, ‘बेटे मुझे ठंड लगती है, एक कंबल दिला दो।’ कंबल की मांग सुनकर सब चुप हो गए, अकेले कंबल दिलाने की किसी के बस की बात नहीं थी, फिर भी एक लड़के ने पूछा, ‘कंबल कितने का आएगा?’

‘यही करीब डेढ़-दो सौ रूपए का’। अब लड़कों को फकीर पर रहम आ गया। लड़कों ने वहां खड़ी महिलाओं से अनुनय विनय करके पैसे जुटा लिए और बोले, ‘चलो बाबा तुम्हें कंबल दिलाएं।’

‘यहां कंबल अच्छा नहीं मिलेगा भिखारी ने दूसरे इलाके में स्थित एक दुकान का नाम बताते हुए कहा, वहां सही मिलेगा। लड़कों ने वहां जाने में असमर्थता व्यक्त की और फकीर को रुपए देते हुए कहा, ‘लो बाबा पैसे, आप ही खरीद लेना’। भिखारी ने खुशी से रुपए ले लिए और दुआएं देते हुए चला गया। थोड़ी देर के बाद उन्हीं लड़कों में से एक लड़का गली में आया और अपने साथियों को आवाज देने लगा। सभी लड़के अपने घरों से निकल आए। उस लड़के ने बताया कि वह भिखारी अभी कलारी (शराब की दुकान) में खड़ा है। सब तेजी से गली से बाहर दौड़े और देखा, वही भिखारी था। वे उसे पीटने लगे। तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कहा, ‘कभी-कभी दान भी व्यर्थ चला जाता है’

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